भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था / India: The world’s fourth largest economy 2025

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जिसने हाल ही में जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अप्रैल 2025 के विश्व आर्थिक परिदृश्य (वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक) के अनुसार, भारत का नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025 में 4.187 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है,

जो जापान के 4.186 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से थोड़ा अधिक है। इस उपलब्धि ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर ला खड़ा किया है। यह लेख भारत की इस आर्थिक उपलब्धि, इसके कारणों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करता है।

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भारत की आर्थिक यात्रा-

भारत की आर्थिक प्रगति का इतिहास लंबा और जटिल रहा है। स्वतंत्रता के बाद से, भारत ने कई आर्थिक नीतियों और सुधारों को अपनाया, जिसने इसे आज की स्थिति तक पहुंचाया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण ने भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर एक नई दिशा दी। उस समय, देश एक गंभीर भुगतान संतुलन संकट का सामना कर रहा था, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने लाइसेंस राज को समाप्त करने, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए। इन सुधारों ने भारत को एक बंद अर्थव्यवस्था से एक खुली, बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था में बदल दिया।

पिछले दो दशकों में, भारत ने तीव्र आर्थिक वृद्धि देखी है। विश्व बैंक के अनुसार, भारत ने 2011 से 2019 के बीच अपनी अत्यधिक गरीबी की दर को आधा कर दिया, जो 2017 की खरीद शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर प्रति व्यक्ति 2.15 डॉलर से कम आय वाले लोगों की संख्या को दर्शाता है। इसके अलावा, भारत ने अपनी जीडीपी को 2006-07 में 9.4% की वृद्धि दर के साथ तेजी से बढ़ाया, और हाल के वर्षों में यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है।

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के कारण-

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के इस मुकाम तक पहुंचने के कई कारण हैं। सबसे पहले, मजबूत घरेलू मांग और निवेश ने भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दी है। 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.2% रही, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उपभोग में वृद्धि और सार्वजनिक निवेश, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में, ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।

दूसरा, भारत सरकार की नीतियों और सुधारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ जैसे कार्यक्रमों ने निवेश को आकर्षित किया और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाया। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नीतियों में ढील और औद्योगिक लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को कम करने से भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक, भारत में संचयी एफडीआई इक्विटी प्रवाह 1.05 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

तीसरा, भारत की सेवा क्षेत्र की वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इसके अलावा, भारत ने डेटा सेंटर उद्योग में भी उल्लेखनीय प्रगति की है, और यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र (चीन को छोड़कर) में सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब बन गया है।

भारत की वैश्विक स्थिति-

आईएमएफ के अनुसार, भारत न केवल नाममात्र जीडीपी के मामले में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि खरीद शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर यह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह स्थिति भारत की आर्थिक ताकत को दर्शाती है, खासकर जब लागत और जीवन स्तर को ध्यान में रखा जाता है। भारत की जनसंख्या, जो 1.4 अरब से अधिक है, एक विशाल उपभोक्ता बाजार प्रदान करती है, जो वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक है।

भारत ने हाल के वर्षों में अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, भारत ने 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास रॉकेट भेजने वाला पहला देश बना। इसके अलावा, भारत ने यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की संख्या में वृद्धि देखी है, जो नवाचार और उद्यमिता को दर्शाता है।

चुनौतियां और कमियां-

हालांकि भारत की आर्थिक प्रगति प्रभावशाली है, लेकिन कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती असमानता है। विश्व असमानता डेटाबेस के अनुसार, भारत में आर्थिक असमानता पिछले सौ वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर है। देश की शीर्ष 1% आबादी 40% से अधिक राष्ट्रीय संपत्ति को नियंत्रित करती है, जबकि गरीब आबादी अभी भी जीवन रेखा के किनारे पर रहती है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में, भारत 140वें स्थान पर है, जो इसकी आर्थिक असमानता को दर्शाता है।

बेरोजगारी एक और प्रमुख मुद्दा है। शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी की दर विशेष रूप से अधिक है। विश्व बैंक के क्षेत्रीय अर्थशास्त्री के अनुसार, भारत अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा उपयोग करने में विफल हो सकता है यदि वह पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं करता। ‘मेक इन इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों ने कुछ हद तक निवेश को आकर्षित किया है, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है।

इसके अलावा, भारत की वैश्विक व्यापार में स्थिति कुछ हद तक अनिश्चित है। संयुक्त राज्य अमेरिका, जो भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, के साथ व्यापार घाटा और संभावित टैरिफ नीतियां भारत की निर्यात वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। भारत की उच्च टैरिफ दरें (12% की व्यापार-भारित औसत) इसे पारस्परिक टैरिफ के लिए कमजोर बनाती हैं।

भविष्य की संभावनाएं-

आईएमएफ और अन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत 2027-28 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। भारत की जीडीपी 2027 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, भारत को अपनी नीतियों को और अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने की आवश्यकता होगी।

शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला कार्यबल भागीदारी में निवेश से भारत अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता का लाभ उठा सकता है। इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी में निवेश भारत को 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा। विश्व बैंक ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन कार्यक्रम का समर्थन किया है, जिसमें मध्य प्रदेश में 750 मेगावाट और 1500 मेगावाट के सौर ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।

भारत की आर्थिक यात्रा-

  • स्वतंत्रता के बाद: 1991 के आर्थिक उदारीकरण ने भारत को बंद अर्थव्यवस्था से खुली, बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था में बदला।
  • आर्थिक वृद्धि: विश्व बैंक के अनुसार, भारत ने 2011-2019 के बीच अत्यधिक गरीबी को आधा किया। 2024-25 में जीडीपी वृद्धि दर 6.2% रही।
  • सुधार: ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों ने निवेश को बढ़ावा दिया।

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के कारण-

  1. मजबूत घरेलू मांग: ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उपभोग और बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश।
  2. सरकारी नीतियां: एफडीआई नीतियों में ढील और औद्योगिक लाइसेंसिंग में कमी।
  3. सेवा क्षेत्र: सूचना प्रौद्योगिकी और डेटा सेंटर उद्योग में प्रगति।

चुनौतियां-

  • असमानता: शीर्ष 1% आबादी 40% से अधिक संपत्ति नियंत्रित करती है।
  • बेरोजगारी: शिक्षित युवाओं में उच्च बेरोजगारी दर।
  • वैश्विक व्यापार: उच्च टैरिफ और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार घाटा।

भविष्य की संभावनाएं-

  • तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: भारत 2027-28 तक जर्मनी को पीछे छोड़ सकता है।
  • टिकाऊ विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश।
  • वैश्विक प्रभाव: जी20 की मेजबानी और चंद्र मिशन जैसे कदम भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं।

निष्कर्ष-

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो देश की आर्थिक नीतियों, सुधारों और वैश्विक एकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, इस प्रगति के साथ-साथ असमानता, बेरोजगारी और व्यापारिक अनिश्चितताओं जैसे मुद्दों को संबोधित करना महत्वपूर्ण है। यदि भारत अपनी वर्तमान गति और रणनीतियों को बनाए रखता है, तो यह न केवल तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, बल्कि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के अपने लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकता है। यह यात्रा चुनौतियों से भरी होगी, लेकिन भारत की युवा आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग और नवाचार की भावना इसे वैश्विक आर्थिक मंच पर एक प्रमुख शक्ति बनने की दिशा में ले जा रही है।

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