रितेश अग्रवाल: एक युवा उद्यमी की प्रेरणादायक यात्रा
रितेश अग्रवाल एक ऐसा नाम है जो भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक बन गया है। वे ओयो रूम्स (OYO Rooms) के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं, जो आज विश्व के सबसे बड़े बजट होटल नेटवर्क में से एक है। उनकी कहानी एक साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर असाधारण सफलता तक पहुंचने की प्रेरणादायक यात्रा है। रितेश ने अपनी मेहनत, नवाचार और दृढ़ संकल्प से न केवल एक सफल व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि लाखों युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि सपने सच हो सकते हैं। इस लेख में हम रितेश अग्रवाल के जीवन, उनके संघर्ष, ओयो की स्थापना और उनकी उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

रितेश अग्रवाल प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
रितेश अग्रवाल का जन्म 16 नवंबर 1993 को ओडिशा के बिस्सम कटक नामक एक छोटे से कस्बे में हुआ था। वे एक मध्यमवर्गीय मारवाड़ी परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो बाद में रायगढ़, ओडिशा में बस गया। उनके परिवार का एक छोटा सा व्यवसाय था, जो उनकी आजीविका का आधार था। रितेश की प्रारंभिक शिक्षा रायगढ़ के सेक्रेड हार्ट स्कूल में हुई। बचपन से ही वे पढ़ाई के साथ-साथ तकनीक और कोडिंग में गहरी रुचि रखते थे। महज 8 साल की उम्र में उन्होंने कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था, जो उनकी प्रतिभा का पहला संकेत था।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा टिटिलागढ़ और फिर सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। 12वीं कक्षा के बाद रितेश ने दिल्ली में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में दाखिला लिया, लेकिन उनकी उद्यमशीलता की चाहत ने उन्हें पढ़ाई पूरी करने से पहले ही कुछ नया शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। यह निर्णय उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

Oyo की नींव: एक विचार का जन्म
रितेश अग्रवाल को यात्रा करना बहुत पसंद था। किशोरावस्था में वे अक्सर भारत के विभिन्न हिस्सों में घूमते थे। इस दौरान उन्हें एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा – सस्ते और अच्छे होटलों की कमी। कई बार उन्हें महंगे होटलों में ठहरना पड़ता था, जहां सुविधाएं अपेक्षा से कम होती थीं, या फिर सस्ते होटलों में रुकना पड़ता था, जहां स्वच्छता और सेवा का अभाव होता था। इस अनुभव ने उनके दिमाग में एक विचार जगा – क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जो बजट में अच्छी सुविधाओं वाले होटल उपलब्ध कराए?
साल 2011 में, मात्र 17 साल की उम्र में, रितेश ने अपना पहला स्टार्टअप “ओरावेल स्टेज” (Oravel Stays) शुरू किया। यह एक ऑनलाइन मंच था जो यात्रियों को किफायती ठहरने की सुविधा प्रदान करता था, कुछ हद तक Airbnb की तर्ज पर। हालांकि, यह शुरुआत बहुत सफल नहीं रही। लेकिन रितेश अग्रवाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमियों को समझा और अपने विचार को और बेहतर करने की दिशा में काम शुरू किया।
2012 में, रितेश अग्रवाल का स्टार्टअप वेंचर नर्सरी प्रोग्राम में शामिल हुआ, जो एक एक्सेलेरेटर प्रोग्राम था। इसके बाद 2013 में उन्हें थिएल फेलोशिप मिली, जो पीटर थिएल द्वारा शुरू की गई एक प्रतिष्ठित पहल है। इस फेलोशिप के तहत उन्हें 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 82 लाख रुपये) की ग्रांट मिली। इस धन का उपयोग करते हुए, मई 2013 में रितेश अग्रवाल ने “ओयो रूम्स” की स्थापना की। OYO का मतलब “On Your Own” है, जो इसकी मूल सोच को दर्शाता है – हर यात्री को अपने बजट में बेहतर ठहरने का अनुभव देना।

Oyo का विकास और वैश्विक विस्तार
ओयो की शुरुआत गुरुग्राम में सिर्फ 5 होटलों के साथ हुई थी। रितेश का मॉडल सरल लेकिन क्रांतिकारी था – छोटे और मध्यम आकार के होटलों के साथ साझेदारी करना, उन्हें मानकीकृत सुविधाएं (जैसे स्वच्छ कमरे, वाई-फाई, और अच्छी सेवा) प्रदान करने में मदद करना, और फिर इन होटलों को अपने प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाना। इस मॉडल ने जल्द ही लोकप्रियता हासिल की।
2015 तक ओयो भारत के 100 से अधिक शहरों में फैल गया था। इसके बाद कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कदम रखा। सॉफ्टबैंक, सिकोइया इंडिया, ग्रीनओक्स कैपिटल जैसे बड़े निवेशकों ने ओयो में निवेश किया, जिससे इसका विस्तार और तेज हुआ। आज ओयो 80 से अधिक देशों के 800 से ज्यादा शहरों में मौजूद है। यह भारत का सबसे बड़ा होटल नेटवर्क बन चुका है और वैश्विक स्तर पर भी इसकी मजबूत पहचान है।

साल 2024 में ओयो ने अपने पहले पूर्ण-वर्ष मुनाफे की घोषणा की, जिसमें वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 229 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया। यह रितेश और उनकी टीम के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। कंपनी ने नॉर्डिक देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसे बाजारों में भी अपनी स्थिति मजबूत की।
व्यक्तिगत जीवन और पुरस्कार
रितेश अग्रवाल ने 7 मार्च 2023 को लखनऊ की गीतांशा सूद से शादी की। उनकी शादी में कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे। हालांकि, शादी के कुछ दिनों बाद उनके पिता रमेश अग्रवाल का निधन हो गया, जो उनके लिए एक बड़ा व्यक्तिगत नुकसान था।
रितेश की उपलब्धियां प्रभावशाली हैं। 2020 में वे दुनिया के दूसरे सबसे युवा सेल्फ-मेड अरबपति बने। उनकी संपत्ति 2024 में हुरुन रिच लिस्ट के अनुसार 1,900 करोड़ रुपये (लगभग 225 मिलियन डॉलर) आंकी गई। उन्हें फोर्ब्स की “30 अंडर 30” सूची में जगह मिली और वे थिएल फेलोशिप प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बने। इसके अलावा, वे टीवी शो “शार्क टैंक इंडिया” के तीसरे सीजन में सबसे युवा शार्क के रूप में नजर आए।

चुनौतियां और विवाद
रितेश अग्रवाल का सफर चुनौतियों से भरा रहा। शुरुआती दिनों में उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। ओयो के सह-संस्थापक मनीष सिन्हा ने उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था, हालांकि कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। इसके अलावा, कंपनी को वित्तीय संकट और कोविड-19 महामारी के दौरान भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। लेकिन रितेश ने हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया और ओयो को फिर से मजबूत स्थिति में लाया।

निष्कर्ष
रितेश अग्रवाल की कहानी यह साबित करती है कि उम्र और संसाधनों की कमी सपनों को हासिल करने में बाधा नहीं बन सकती। उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और नवाचार ने ओयो को एक वैश्विक ब्रांड बनाया। वे न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपनों को सच करना चाहते हैं। रितेश की यह यात्रा हमें सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
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